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हाउसकीपिंग का नक़्शा

कमरा चुनिए, तरकीब उठाइए, फ़ोन बाहर रखिए

एक बार में पूरा घर नहीं, सिर्फ़ एक कमरा। हर कमरे की फ़ाइल में दो-तीन तरकीबें हैं, और यह भी कि उस काम में आँखों को क्या बदलाव मिलता है और वह क्या नहीं करता।

दरवाज़े के पीछे का कार्ड

पहले सुरक्षा, फिर सफ़ाई

होटल के कमरे में दरवाज़े के पीछे ज़रूरी निर्देश टँगे होते हैं। काम शुरू करने से पहले ये पढ़ लीजिए, क्योंकि घर के सफ़ाई के सामान का असर आँखों और साँस पर पड़ सकता है।

रसायन मिलाइए मत

ब्लीच को अमोनिया, एसिड वाले टॉयलेट क्लीनर या किसी और क्लीनर के साथ कभी न मिलाएँ। इससे हानिकारक गैस बन सकती है। पैक पर लिखी हिदायत पढ़िए।

स्प्रे चेहरे से दूर

स्प्रे को नीचे की ओर या कपड़े पर कीजिए, अपनी ओर या ऊपर की ओर नहीं। ऊँची जगह साफ़ करते समय कुछ लोगों के लिए साधारण चश्मा भी छींटों से बचाव दे सकता है।

हवा आने दीजिए

खिड़की-दरवाज़ा खोलकर काम कीजिए। बंद बाथरूम में तेज़ क्लीनर देर तक इस्तेमाल न करें, और दस्ताने पहनिए।

धूल को गीला पकड़िए

सूखे झाड़न की जगह हल्का गीला कपड़ा धूल को कम उड़ाता है। धूल से आँखों में चुभन या छींक होती हो, तो मास्क पहनिए या यह काम किसी और को दीजिए।

ऊँचाई पर सावधानी

स्टूल या कुर्सी पर चढ़कर पंखा साफ़ न करें। स्थिर सीढ़ी और पास में किसी व्यक्ति का होना बेहतर है। चक्कर आए तो तुरंत नीचे उतरिए।

किन्हें अतिरिक्त ध्यान रखना है

गर्भवती महिलाएँ, बुज़ुर्ग, बच्चे, दमा या एलर्जी वाले लोग, और हाल में आँख की सर्जरी कराने वाले लोग भारी काम और तेज़ रसायनों के बारे में पहले डॉक्टर से पूछें। क्लीनर बच्चों की पहुँच से दूर रखिए।

आँख में क्लीनर चला जाए तो

आँख रगड़िए मत। कॉन्टैक्ट लेंस हो तो निकाल दीजिए, साफ़ बहते पानी से कम से कम 15 मिनट आँख धोते रहिए और तुरंत अस्पताल जाइए या 112 पर कॉल कीजिए। साथ में क्लीनर का पैक ले जाना मददगार रहता है।

कमरों की फ़ाइलें

छह कमरे, हर एक का अपना तरीक़ा

एक दिन में एक फ़ाइल काफ़ी है। जो कमरा आज सबसे ज़्यादा खटकता है, वहीं से शुरू कीजिए।

रसोई

तेल, मसाले और डिब्बों की दुनिया।

  • चिकनी शेल्फ़ पर गुनगुने पानी और बर्तन धोने वाले साबुन का कपड़ा फेरिए, कुछ मिनट छोड़कर पोंछिए। चिपचिपाहट आसानी से उतरती है।
  • चिमनी की जाली को गर्म साबुन वाले पानी के टब में भिगोकर रखिए, रगड़ना कम पड़ेगा।
  • स्टील के डिब्बों पर नाम की पर्ची पीछे नहीं, सामने लगाइए। एक शेल्फ़ एक दिन में पूरी हो जाती है।

आँखों के लिए

पास के लेबल पढ़ना और फिर पीछे हटकर पूरी शेल्फ़ देखना नज़र की दूरी बदलता है।

यह क्या नहीं करता

छौंक के धुएँ से आँखों में जलन हो तो चिमनी या हवा की ज़रूरत है, सफ़ाई का विराम उसका जवाब नहीं।

बैठक

किताबें, रिमोट और मेहमानों की जगह।

  • किताबों की धूल हल्के गीले कपड़े से ऊपर से नीचे की ओर पोंछिए, ताकि गिरी धूल दोबारा साफ़ न करनी पड़े।
  • पुराने मोज़े को हाथ पर चढ़ाकर ब्लाइंड या जाली की पट्टियाँ साफ़ कीजिए, यह झाड़न जैसा काम करता है।
  • सोफ़े के गद्दे हटाकर नीचे की झाड़ू लगाइए। महीने में एक बार काफ़ी है।

आँखों के लिए

पूरे कमरे को घूमकर देखने में नज़र कमरे के दूसरे सिरे तक जाती है। टीवी भी इतनी देर बंद रहता है।

यह क्या नहीं करता

पढ़ते समय अक्षर धुँधले लगते हों तो यह सफ़ाई का नहीं, आँखों की जाँच का विषय है।

शयनकक्ष

अलमारी, चादरें और सोने से पहले का समय।

  • अलमारी का सिर्फ़ एक ख़ाना खाली कीजिए। जो एक साल से नहीं पहना, उसके लिए अलग थैला रखिए।
  • चादर का सेट एक तकिये के ग़िलाफ़ में रखिए, धुले कपड़े ढूँढने का झंझट नहीं रहेगा।
  • बिस्तर के पास चार्जर की जगह किताब और छोटा लैंप रखिए। सुबह का पहला काम कम-से-कम फ़ोन न रहे।

आँखों के लिए

कपड़ों की तह में स्क्रीन की चमक नहीं होती और हाथों का काम धीमा रहता है।

यह क्या नहीं करता

साफ़ कमरा नींद की किसी समस्या का इलाज नहीं है। लगातार नींद न आए तो डॉक्टर से बात कीजिए।

खिड़कियाँ

शीशे, पर्दे और बाहर की दुनिया।

  • शीशे पर पानी और थोड़े सफ़ेद सिरके का घोल कपड़े पर लेकर पोंछिए, फिर पुराने अख़बार या सूखे कपड़े से चमकाइए।
  • तेज़ धूप के समय शीशा जल्दी सूखकर धब्बे छोड़ता है। सुबह या शाम का समय चुनिए।
  • जाली पर हल्का गीला कपड़ा फेरिए और ऊपर के हिस्से के लिए लंबे डंडे वाला पोंछा लीजिए, बाहर की ओर झुकिए मत।

आँखों के लिए

यह सबसे सीधा विराम है: काम के बीच-बीच में नज़र शीशे से हटकर दूर के पेड़ या छत पर जाती है।

यह क्या नहीं करता

दूर देखना आरामदेह लग सकता है, पर इससे चश्मे का नंबर नहीं बदलता। सीधे सूरज की ओर कभी न देखें।

बालकनी

गमले, कपड़ों की रस्सी और खुली हवा।

  • पौधों के पत्ते गीले कपड़े से पोंछिए। चौड़े पत्तों पर जमी धूल आसानी से उतर जाती है।
  • गमलों के नीचे की तश्तरी खाली कीजिए, ठहरा पानी मच्छरों को बुलाता है।
  • फ़र्श धोने से पहले सूखी झाड़ू लगाइए, वरना धूल कीचड़ बनकर नाली रोकती है।

आँखों के लिए

दिन की रोशनी में काम होता है और सामने की इमारतें, पेड़ और आसमान नज़र की सीमा बढ़ाते हैं।

यह क्या नहीं करता

गमले की मिट्टी के बाद हाथ धोए बिना आँखें न छुएँ। लालिमा या जलन रहे तो डॉक्टर को दिखाएँ।

पूजा कोना

पीतल, दीये और छोटी-छोटी चीज़ें।

  • पीतल पर इमली का गूदा या नींबू और नमक मलिए, कुछ देर बाद धोकर सूखे सूती कपड़े से पोंछिए।
  • दीये का पुराना तेल गर्म पानी और बेसन से उतरता है। नाली में तेल न बहाइए।
  • पीतल पर चढ़ी परत वाली मूर्तियों पर खटाई न लगाएँ। पहले एक कोने पर आज़माइए।

आँखों के लिए

यह पास का काम है, इसलिए बीच में उठकर खिड़की तक जाइए। रोशनी अच्छी हो तो आँखों पर ज़ोर नहीं पड़ता।

यह क्या नहीं करता

नींबू-इमली के हाथ आँखों में जलन दे सकते हैं, इसलिए काम के बाद साबुन से हाथ धोइए।

A man in red overalls and glasses cleaning high up with a long pole in a modern kitchen
हाउसकीपिंग की ट्रॉली

सामान एक जगह, तो फ़ोन की ज़रूरत नहीं

सामान ढूँढने जाते ही हाथ फ़ोन तक पहुँच जाता है। एक बाल्टी या टोकरी को ट्रॉली मानिए और उसे तीन हिस्सों में रखिए।

ऊपरी ख़ाना: रोज़ का

सूती कपड़े, हल्का गीला झाड़न, कचरे का छोटा थैला।

बीच का ख़ाना: धुलाई का

साबुन का घोल, सिरके के पानी की बोतल, स्पंज, नरम ब्रश।

निचला ख़ाना: बचाव का

दस्ताने, मास्क और तेज़ क्लीनर की बंद बोतल, जिस पर उसका नाम साफ़ लिखा हो।

ड्यूटी रोस्टर

भारतीय मौसम के हिसाब से घर की ड्यूटी

हर मौसम का अपना काम होता है। शहर और घर के अनुसार इसे बदल लीजिए।

मौसम घर में क्या बदलता है इस समय की ड्यूटी बिना स्क्रीन का पल
गर्मी धूल भरी हवा, कूलर और पंखे पर मैल। पंखों की सफ़ाई, कूलर की घास और टंकी धोना, पर्दे धोना। सुबह जल्दी खिड़की खोलकर काम कीजिए।
बरसात सीलन, फफूँद और किताबों-कपड़ों में गंध। अलमारी के पीछे की दीवार देखना, कपड़ों को धूप दिखाना, नालियाँ साफ़ रखना। बारिश रुकने पर बालकनी से दूर तक देखिए।
दीवाली से पहले सालाना सफ़ाई का समय, ढेर सारा पुराना सामान। एक दिन एक कमरा, छत और टांड का सामान उतारना, दान के लिए थैला। परिवार के साथ काम बाँटिए और गाने चलाइए।
सर्दी बंद खिड़कियाँ, सूखी हवा और रज़ाई-कंबल। दोपहर में खिड़कियाँ खोलना, ऊनी कपड़े धूप में रखना। छत पर धूप में कंबल झाड़ते हुए दूर देखिए।

छोटी स्क्रीन पर तालिका को बग़ल में खिसकाकर पूरा देखिए।

खोया-पाया रजिस्टर

सफ़ाई के दौरान लोग क्या खो बैठते हैं

क्या खोयावीडियो देखते हुए सफ़ाई की, और विराम स्क्रीन पर ही बीत गया।

कहाँ मिलेगारेडियो या गाने चलाइए, जिन्हें देखना नहीं पड़ता।

क्या खोयापूरे घर की सूची बनाई और बीच में ही थककर छोड़ दिया।

कहाँ मिलेगाएक दराज़ या एक शेल्फ़ चुनिए। पूरा हुआ काम ही अच्छा लगता है।

क्या खोयातेज़ गंध वाले क्लीनर को ही साफ़ घर का सबूत मान लिया।

कहाँ मिलेगाज़्यादातर रोज़ के काम साबुन और पानी से हो जाते हैं। हवा आने दीजिए।

क्या खोयागंदे दस्ताने या हाथ से आँखें मल लीं।

कहाँ मिलेगाकाम के बीच चेहरा न छुएँ। पहले दस्ताने उतारिए और हाथ धोइए।

क्या खोयाकाम का सबूत फ़ोटो में लेने के लिए फ़ोन उठाया और आधा घंटा निकल गया।

कहाँ मिलेगाफ़ोटो काम पूरा होने के बाद, और चाहें तो बिल्कुल नहीं।

कमरा हो गया, अब थोड़ा ठहरिए

विराम कितना लंबा रखें और शाम की आदत कैसी हो, यह अगले पन्ने पर है।

ध्यान और विश्राम

ज़िम्मेदारी से पढ़ने के लिए

घर की सफ़ाई और स्क्रीन से छोटे विराम पर हमारी सामग्री सामान्य शिक्षा और जीवनशैली की जागरूकता के लिए लिखी गई है। इसमें सफ़ाई की तरकीबें, गैजेट से दूर बिताए समय के तरीक़े और आँखों के रोज़मर्रा के आराम की आदतें शामिल हैं। यह ड्राई आई, चश्मे का नंबर बदलने, मोतियाबिंद, ग्लूकोमा, एलर्जी या ध्यान से जुड़ी किसी समस्या की जाँच या इलाज का विकल्प नहीं है। किसी नतीजे की गारंटी नहीं दी जाती और हर व्यक्ति का अनुभव अलग हो सकता है। नज़र में बदलाव, आँखों में दर्द या लगातार परेशानी हो तो योग्य नेत्र विशेषज्ञ या डॉक्टर से मिलिए।